आततायी सत्ता और प्रतिराेध-2
पूरा अंक पढ़ने के लिए क्लिक करें
अनुक्रम
संपादकीय:
आततायी सत्ता के दौर में विपदाएं ही विपदाएं
प्रतिरोध का संकल्प
अखिल भारतीय लेखक-कलाकार-वैज्ञानिक कन्वेंशन: ऐलान
आततायी मुहिम के नख-दंत
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की विचारधारा और स्त्रियां : शुभा
इतिहास और समकालीन राजनीति : नलिनी तनेजा
मोदी और चौथे खंभे का विध्वंस : टी.के. राजलक्ष्मी
विवेक और वैज्ञानिक सोच पर हमला : डी. रघुनंदन
बड़े व्यावसायिक घराने और भाजपा : सुरजीत मजूमदार
औचक तालाबंदी में बेबस मज़दूर
बेसहारा मज़दूरों की गांव वापसी पर छह कविताएं :
विष्णु नागर, संजय कुंदन, नवल शुक्ल, धीरेंद्र तिवारी, देवी प्रसाद मिश्र, सृष्टि श्रीवास्तव
कविताएं
मंगलेश डबराल, कुलदीप कुमार, लीलाधर मंडलोई, जयप्रकाश कर्दम, हरीश चंद्र पाण्डे, चैतन्य मित्र,
विवेक निराला, संतोष चतुर्वेदी, बसंत त्रिपाठी, अंशु मालवीय, देवेंद्र चौबे, बली सिंह, महेंद्र सिंह बेनीवाल,
सुदेश तनवर, मणिमोहन, सपना चमड़िया, विनीताभ, सीमा संगसार, टेकचंद, रानी कुमारी, उपासना गौतम, सुरेंद्र कुमार पांडेय
गद्य कविता
काफ़ी मनुष्य होने के संस्मरण : देवी प्रसाद मिश्र
ग़ज़लें और नज़्में
वक़ार सिद्दीक़ी, चंचल चौहान, सागर सयालकोटी, बल्ली सिंह चीमा,
महेश कटारे ‘सुगम’, मुमताज, तसनीफ़ हैदर
कथा-कहानी
और मूर्ति रोती रही : इब्ने कंवल
मुक्ति द्वार के बाहर : महेश दर्पण
बाबा के दरवाजे़ : संजय कुंदन
आठ लघुकथाएं : संदीप मील
एन.एच. 43 की मौत : विश्वासी एक्का
नाटक और सिनेमा
सांस्कृतिक प्रतिरोध में नाटक की भूमिका : चंद्रेश
सिनेमा में प्रतिरोध के मायने : संजय जोशी
पुस्तक समीक्षा
जस्टिस लोया की विवादित मौत : मुरली मनोहर प्रसाद सिंह
लंबे विलंबित के बाद उठता स्वर : दिनेश कुमार शुक्ल
कन्वेंशन रिपोर्ट
हम देखेंगेः प्रस्तुति / आशुताेष कुमार व संजीव कुमार
=====================================================================
स्मृतिशेष
इस बीच जाने माने कवि रचनाकार गंगा प्रसाद विमल, प्रसिद्ध कथाकार कृष्ण बलदेव वैद, कथाकार गिरिराज किशोर, प्रगतिशील लेखक आलोचक खगेंद्र ठाकुर, लेखक और प्रकाशन संस्था, ग्रंथशिल्पी के संस्थापक डा. श्याम बिहारी राय, कहानीकार और संपादक प्रेम भारद्वाज, चित्राकला की दुनिया की महान शख़्सियत सतीश गुजराल, इतिहासकार प्रो. अर्जुन देव, कवि केदार नाथ कंत, कथाकार सुषुम बेदी, उपन्यासकार राजकृष्ण मिश्र, आदिवासी चित्रकार पेमा फत्या जैसे कई रचनाशील व्यक्तित्व दिवंगत हो गये। नया पथ परिवार की ओर से इन सभी को भावभीनी श्रद्धांजलि।
सांप्रदायिक हिंसा और तालाबंदी से उपजे संकट की वजह से अनेक मज़दूर, साधनहीन ग़रीब और कोरोना वायरस की चपेट में आये बहुमूल्य जीवन खो देने वाले नागरिकों को हमारी हार्दिक श्रद्धांजलि।
=====================================================================
पूरा अंक पढ़ने के लिए क्लिक करें
अनुक्रम
संपादकीय:
आततायी सत्ता के दौर में विपदाएं ही विपदाएं
प्रतिरोध का संकल्प
अखिल भारतीय लेखक-कलाकार-वैज्ञानिक कन्वेंशन: ऐलान
आततायी मुहिम के नख-दंत
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की विचारधारा और स्त्रियां : शुभा
इतिहास और समकालीन राजनीति : नलिनी तनेजा
मोदी और चौथे खंभे का विध्वंस : टी.के. राजलक्ष्मी
विवेक और वैज्ञानिक सोच पर हमला : डी. रघुनंदन
बड़े व्यावसायिक घराने और भाजपा : सुरजीत मजूमदार
औचक तालाबंदी में बेबस मज़दूर
बेसहारा मज़दूरों की गांव वापसी पर छह कविताएं :
विष्णु नागर, संजय कुंदन, नवल शुक्ल, धीरेंद्र तिवारी, देवी प्रसाद मिश्र, सृष्टि श्रीवास्तव
कविताएं
मंगलेश डबराल, कुलदीप कुमार, लीलाधर मंडलोई, जयप्रकाश कर्दम, हरीश चंद्र पाण्डे, चैतन्य मित्र,
विवेक निराला, संतोष चतुर्वेदी, बसंत त्रिपाठी, अंशु मालवीय, देवेंद्र चौबे, बली सिंह, महेंद्र सिंह बेनीवाल,
सुदेश तनवर, मणिमोहन, सपना चमड़िया, विनीताभ, सीमा संगसार, टेकचंद, रानी कुमारी, उपासना गौतम, सुरेंद्र कुमार पांडेय
गद्य कविता
काफ़ी मनुष्य होने के संस्मरण : देवी प्रसाद मिश्र
ग़ज़लें और नज़्में
वक़ार सिद्दीक़ी, चंचल चौहान, सागर सयालकोटी, बल्ली सिंह चीमा,
महेश कटारे ‘सुगम’, मुमताज, तसनीफ़ हैदर
कथा-कहानी
और मूर्ति रोती रही : इब्ने कंवल
मुक्ति द्वार के बाहर : महेश दर्पण
बाबा के दरवाजे़ : संजय कुंदन
आठ लघुकथाएं : संदीप मील
एन.एच. 43 की मौत : विश्वासी एक्का
नाटक और सिनेमा
सांस्कृतिक प्रतिरोध में नाटक की भूमिका : चंद्रेश
सिनेमा में प्रतिरोध के मायने : संजय जोशी
पुस्तक समीक्षा
जस्टिस लोया की विवादित मौत : मुरली मनोहर प्रसाद सिंह
लंबे विलंबित के बाद उठता स्वर : दिनेश कुमार शुक्ल
कन्वेंशन रिपोर्ट
हम देखेंगेः प्रस्तुति / आशुताेष कुमार व संजीव कुमार
=====================================================================
स्मृतिशेष
इस बीच जाने माने कवि रचनाकार गंगा प्रसाद विमल, प्रसिद्ध कथाकार कृष्ण बलदेव वैद, कथाकार गिरिराज किशोर, प्रगतिशील लेखक आलोचक खगेंद्र ठाकुर, लेखक और प्रकाशन संस्था, ग्रंथशिल्पी के संस्थापक डा. श्याम बिहारी राय, कहानीकार और संपादक प्रेम भारद्वाज, चित्राकला की दुनिया की महान शख़्सियत सतीश गुजराल, इतिहासकार प्रो. अर्जुन देव, कवि केदार नाथ कंत, कथाकार सुषुम बेदी, उपन्यासकार राजकृष्ण मिश्र, आदिवासी चित्रकार पेमा फत्या जैसे कई रचनाशील व्यक्तित्व दिवंगत हो गये। नया पथ परिवार की ओर से इन सभी को भावभीनी श्रद्धांजलि।
सांप्रदायिक हिंसा और तालाबंदी से उपजे संकट की वजह से अनेक मज़दूर, साधनहीन ग़रीब और कोरोना वायरस की चपेट में आये बहुमूल्य जीवन खो देने वाले नागरिकों को हमारी हार्दिक श्रद्धांजलि।
=====================================================================
No comments:
Post a Comment